daughters

मेरी छोटी सी सहेली, मेरी बेटी

नन्ही सी गुड़िया मेरे घर आई थी, कच्ची उंगलियाँ, रूई सा स्पर्श, हल्की इतनी जैसे कोमल कोई फूल, बचा बचा कर पकड़ती थी, के कहीं हो जाए ना भूल, दूध पिलाती, तो सीने से चिपकी रहती, ना जाने कब दूध… Read More ›