Mon. Jan 27th, 2020

Miss Zesty

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माँ तुझे तो कुछ नहीं आता

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माँ तुझे तो कुछ नहीं आता

फिर आ जाएगी मेरे पीछे पीछे हर पल,
फिर से तू मेरे लिए सब कुछ करेगी कल,
फिर से तू मेरे लिए ही जीने लगेगी,
फिर मेरी खुशियों में खुश होने लगेगी,
फिर मेरे आँसू तेरे आँसू बन जायेंगे,
फिर मेरे दुश्मन तेरे दुश्मन हो जायेंगे,
क्या तुझे अपने लिए जीना नही आता,
ओ मेरी भोली सी माँ तुझे तो कुछ नही आता।

कितने आँसुं सोखेगा तेरा ये साड़ि का पल्लू?
कितनी दुआएँ मांगेंगी मेरे लिए तेरी थकी आँखें?
माँ तुझे तो अपने लिए कुछ मांगना नही  आता।
ओ मेरी भोली सी माँ तुझे तो कुछ नही आता।

माँ तुझे तो कुछ नही आता
थक जाए तो थकान नही दिखानी आती,
सब छुपा कर क्यों लगी रहती है मेरे पीछे पीछे?
कहाँ से तेरे बूढ़े पैरों में इतनी जान आ जाती हैं?
माँ तुझे तो कुछ नही आता।

दर्द नही होता तुझे, की कष्ट नही होता?
गम नही हैं अपने कोइ, की जब देखो मेरे ही बारे में सोचती है?
क्यूँ मेरे ही पीछे पड़ी रहती है?
मेरा काम, मेरी जिंदगी, मेरे दर्द, मेरी तकलीफ़,
मेरी चिंता ही क्यूँ तेरी चिंता बन जाती है?
क्या अपने बारे में सोचना तुझे बिलकुल नही आता?

सोचती हूँ क्या तेरे काबिल भी हूँ ओ माँ?
क्या तुझे कभी में  कुछ दे भी पाऊंगी?
क्या तुझे अपने लिए जीते हुए देखूंगी?
क्या तुझे दो पल सुकूं के दे भी पाऊंगी?
क्या दर्द को तेरे कभी समझ भी पाऊंगी?
कैसे बताऊँ तुझे ओ माँ की मुझे कुछ नही आता।

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