Sat. Feb 22nd, 2020

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मेरी माँ by Anamika Srivastava

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तुम्ही सुलझाओ मेरी उलझन
कैसे कहूं की तुम कैसी हो
कोई नहीं सृष्टि में तुमसा
माँ तुम बिलकुल माँ जैसी हो।।
माँ जिसके पास मेरे लिए असीमित प्रेम है।।
माँ जिसका धैर्य अतुल्य है
जिसको किसी भी तराजू से तौला नहीं जा सकता।।
माँ जिसने मुझे हर बार गिरने पर उठाया।।
माँ जिसने उंगली पकड़कर मुझे चलना सिखाया।।
माँ जिसने मेरी हर मुश्किल को आसान बनाया।।
माँ जिसने जिंदगी को जिंदादिली से जीना सिखाया।।
माँ जिसने मुझे मेरी हर मंजिल तक पहुंचाया
माँ जिसने मुझ पर अपना सर्वस्व लुटाया।।
ब्रह्मा तो केवल रचता है
तुम पालन भी करती हो
किसे सामने खड़ा करूँ में
और कहूं की तुम ऐसी हो
माँ तुम बिलकुल माँ जैसी हो
माँ जिसने मेरे लिए स्वयं को भुलाया।।
माँ जिसने मुझे खुद मुझसे परिचित करवाया।।
माँ जिसने मेरी हर उलझन को सुलझाया।।
माँ जिसने मुझ पर अथाह प्रेम बरसाया।।
माँ जिसने मुझ पर भरपूर विश्वास जताया।।
माँ जिसने मुझ नादान को हर बार रूठने पर मनाया।।
कयूं करती हो क्षमाँ हमेशा
तुम भी तो जाने कैसी हो
माँ तुम बिलकुल माँ जैसी हो
माँ इतना अद्भुत धैर्य आपने कहाँ से पाया।।
माँ धरती सी धैर्य सरीखी माँ ममता की खान है
माँ की उपमाँ केवल माँ है
माँ सचमुच भगवन है
माँ जिसने मुझे हर रास्ता सच्चाई से पार करना सिखाया।।
माँ मेरी सबसे अच्छी सच्ची पक्की और प्यारी सहेली है।।
माँ झुलसती गर्मी म ठण्डी बारिश की छुवन है।।।।।
माँ जिसके पास प्यार अपार और अपनापन है।।
माँ जो करती है हर इक को खुश रखने का प्रयास
माँ हर दिन ः आपके साथ बहुत ही खास।।।।।।
माँ अब आगे क्या लिखूँ मेरे पास नहीं ः ऐसे शब्दों का भण्डार।।
जो कर सके माँ जैसी शख्सियत का बखान सटीक बरखुर्दार।।
हे ईश्वर ख़ुशियों से भर दे मेरी माँ का संसार।।
मेरी प्यारी माँ गर हुई हो कोई गलती तोह क्षमाँ बारम्बार।।
माँ ज़िन्दगी की हर इक सीख के लिए आपका बहुत बहुत आभार।।
माँता पिता खुद को भूल कर करते हैं अपने बच्चों से बहुत ही प्यार
तो पाठकों से यही ः मेरी दरकार
दें अपने माँता- पिता को खूब आदर सत्कार और ढेर सारा ढेर सारा प्यार ।।

 

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