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Mon. Aug 26th, 2019

Miss Zesty

A Digital Women's Magazine

सुनलो मेरे बाबुल ये कैसी बिदाई है

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सुनलो मेरे बाबुल ये कैसी बिदाई है
आँखो मे है आँसू फिर भी तुम खुश हो||
“उंगली पकड़के तुने चलना हमे सिखाया
हम गिर जाते तो संभालना हमे सिखाया
चोट हमको लगती थी पर दर्द आपको होता था||१||

“सुनलो मेरे भैया ये कैसा बंधन है
ग़लती हम करते थे और सज़ा आपको होती थी
हम पर कोई आँच आए तो आप ढाल हमारी बनते थे||२||

“सुनलो मेरी बहना ये है वही अँगना
जहां बचपन से लेके जवानी हमने बिताई
फिर क्यु होगा अब हमको ये पराया||३||

“सुनलो मेरी सखियाँ याद आएँगी वो गलियां
जहां खेले कूदे थे और लड़ते जगड़ते थे
फिर हम रूठ जाते थे और आप हमे मनाती थी||४||

सुनलो मेरी बेटी ये है प्रीत मिलन की बिदाई
जहां एक बेटी आएगी तो दूसरी घर आ जाएगी
ये सच है मेरी बेटी वो तेरी जगह ना ले पाएगी||५||

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