Sun. Oct 20th, 2019

Miss Zesty

A Digital Women's Magazine

मेरे पापा

1 min read

Photo by Maria Lindsey on Pexels.com

आँखें दिखा कर पढ़ने बैठा दिया,

ज़रा ग़लती हुई तो ज़ोर से डाँट दिया.

माँ ने आकर चुपके से खाना खिलाया,

तो सोचा पापा से छुप कर आई होंगी.

फिर पता चला पापा ने ही भेजा था, मुझे मनाने के लिए.

हमेशा सोचता रहा माँ पसंद की सब सब्ज़ियाँ बनIतीं हैं,

फिर ध्यान गया की पापा हर बार पूछते थे, ‘बच्चों को क्या पसंद है वही ले कर आता हूँ.

पापा को हमेशा बहुत मज़बूत समझा, सोचा कोमल हृदय तो माँ का ही है,

चोट लगी तो माँ मे सीने से लगाकर पूचकारा.

लगा पापा तो बस दवाई ले आए., लगा उन्हें कहाँ चिंता होती है,

बस सब पर अपनी  मर्ज़ी चलाते हैं.

एक बार एक गिफ्ट ले आया उनके लिए, तो ज़ोर से डाँट दिया, ‘क्यूँ पैसे व्यर्थ खर्च करते हो.’

लगा की मानो मेरी भावनाओं की कद्र ही नही है पापा को.

पिता बना तो समझ आया की पिता होना क्या होता है.

माँ को ज़्यादा परेशान ना होना पड़े इसलिए सख्ती करते थे,

मेरा स्वाभिमान कभी अभिमान में ना बदले इसलिए तारीफ भी कम ही करते थे.

मुझे चोट लगे तो रोते देख नही पाते थे इसलिए रात को छुप कर आते थे मेरे पास.

मेरी मेहनत की पाई पाई जुड़ जाए, इसलिए व्यर्थ खर्चे को रोकते थे.

पूरे परिवार के लिए नये कपड़े बनवाते पर खुद वही पुराना कुर्ता पहन लेते थे.

जीवन भर संघर्ष किया, हमारी हर खुशी पूरी करने को,

इस कठोर से चेहरे के पीछे कितना कोमल मन है, अब देख पता हूँ,

उनके क्रोध के पीछे की चिंता को अब समझ पता हूँ,

अब समझ आता है की पनीर पसंद तो उन्हें भी खूब था,

पर कहीं हमें कम ना पड़ जाए इसलिए यही कहते थे, ‘पनीर मुझे पसंद नही.’

ऐसा नही था की उन्हें कुछ पसंद नही आता था,

जानबूझ कर अपने लिए कुछ लेते नही थे.

कमाल है ना, खुद पिता बन कर समझा की कितना प्यार किया मेरे पापा ने,

जीतने सख़्त लगते थे बचपन में, आज मेरे बच्चों के साथ उतने ही कोमल हो गये हैं.

छोटी छोटी चीज़ों में उनकी तारीफ करते हैं, खूब लाड में बिगाड़ते हैं,

उन्हें कुछ हो जाए तो सीने से लगाए रखते हैं.

पिता सख़्त थे पर बाबा बहुत की प्यारे बन गये हैं, मेरे पापा.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Copyright © All rights reserved. Newsphere by AF themes.