बचपन जैसा कुछ और है क्या?

भाई के पीछे साइकल पर बैठ कर, मैने तो सारी दुनिया घूम ली थी
छोटी बहन को लालच देकर ढेरों काम भी करवा लिए.
गर्मियाँ आई तो आम की लड़ाई,
सर्दियों में खेले खेल, और फिर याद आई दादी की रज़ाई.
बाबा मेले में ले गये, कंधो पर बैठा कर तो पापा ने खूब गुड़ियाँ दिलाईं.

बड़े भाई से लडो तो मम्मी कहती, बड़ा है लड़ते नही,
छोटी बहन को डांटा तो मम्मी ने फिर समझाया, ‘छोटी है जाने दो.’
तब लगता था, जल्दी से बड़ी हो जोऊँ तो पीछा छूटे, इन भाई बहन से.
एक से लड़ नही सकते क्यूंकी वो बड़ा है, तो दूसरे को कुछ कह नही सकते क्यूंकी वो छोटी है.
हर चीज़ बाँटों, प्यार हो चाहे खिलौने, किताबें हो चाहे कपड़े.

दोस्तों के साथ बाहर जाओ, तो भाई साथ साथ आता,
साथ भी नही आता तो कौन दोस्त है, कैसे हैं सब नज़र रखता.
रक्षाबन्धन पर पापा से लेकर पैसे पकड़ाता फिर छुप कर पतंग के लिए मुझसे ही माँग लेता.
उफ़! अब ये देदे, अब वो कर दे, काम ख़तम नही होते थे.
कहीं बाहर से आओ तो जैसे मेरे ही इंतज़ार में प्यासा बैठा होता था, ‘बहन एक ग्लास पानी देदे.
हद थी सच में!

कॉलेज तक कुछ दिन खुद छोड़ने गया और फ़िर एक दिन बोला, अब तू खुद जा,
शायद अब समझ गया था, के मैं अपना ध्यान रख लूँगी.
कल तक मुझसे सब काम कराने वाला, अचानक बड़ा हो गया.
मेरी शादी में ऐसे काम किया, उसमें पिता का चेहरा दिखा.
विदाई में छुप गया जाकर कहीं, के देख नही पाएगा मुझे जाते हुए.

कह दिया सबने अब पराई हो गई, भाई को कैसे भूल जोऊँ कहीं,
अब मामा बन गया है, मेरी गुड़िया को काँधे पर बिठाए घूमता है,
वो एक बोले तो चार खिलौने लाता है.
दिन भर उसकी फोटो माँगता है.
ऐसा भी कहीं होता है?

बहन किसी से कम थी क्या?
तेरी ये ड्रेस पहन लूँ, तेरे सॅंडल्ज़ ट्राइ कर लूँ,
मेरा भी मेकप कर ना, मैं भी चलूंगी तेरे साथ.
लगता था, कैसे पीछा छूटेगा इससे.

पर काम बड़े करती थी, मेरे भारी बेग तक उठा लेती थी,
मेरे साथ रहने के लिए सब बात मान जाती थी,
पर आम सबसे बड़ा वो ही खाती थी.

मम्मी की साड़ी से मुँह पोछना, रात को चिपक कर सोना,
फिर जाग कर, ‘भूख लगी है’ का राग अलापना.’
पापा से मम्मी की ही शिकायत करना, और फिर उनका झूठ मूठ मम्मी को डांटना.
दादी के आचार, और बाबा की कहानियाँ,
ताउ जी के साथ घूमना और ताई जी से गुड़िया के कपड़े बनवाना.

एक कविता काफ़ी नही है मेरे बचपन को समेटने के लिए,
एक कविता काफ़ी नही है, क्यूंकी बचपन जैसा कुछ और है क्या?

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