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जीवनसाथी से लड़ना हमेशा नही होता है उतना बुरा

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यह बात झूठ नही है, की कभी कभी जब कोई लड़ना ही छोड़ दे, इसका मतलब शायद उसने उम्मीद ही छोड़ दी.
अक्सर ऐसा होता है, की हम किसी रिश्ते में तब तक, सामने वाले को समझाने की कोशिश करते है, या तब तक ही कोई शिकायत करते हैं जब तक हमारे मन में उनके लिए परवाह होती है. जब हम बोलना ही छोड़ दे इसका मतलब है की हमारा लगाव भी छूटता जा रहा है.
पति पत्नी में होने वाली नोक झोंक भी उनके रिश्ते के बीच की गहराई को दर्शाती है.


यह बोलना भी ग़लत ही होगा की पति पत्नी में कभी कोई नोक झोंक होती ही नही है, या होने ही नही चाहिए. सच कहें तो मुझे तो ऐसा रिश्ता बनावटी ही लगेगा. जब दो लोग इतना समय साथ निभाएँगे, जीवन के हर छोटे बड़े निर्णय लेंगे तो उनके बीच कभी कभी लड़ाई होना तो स्वाभाविक है.

ज़रूरी तो नही की मुझे हर बार मेरे पति ही हर बात सही ही लगे, या वो हमेशा मुझसे सहमत हों. जब कोई मुझे बोलता है की हम तो कभी लड़ते ही नही, तो माफ़ करना पर मेरे दिमाग़ में यह दो बातें आती हैं: एक, उन दोनो का रिश्ता अभी बहुत नया है, या दोनो में से एक इंसान इतना अलग हो चुका है की वो परवाह ही नही करता.


इसका मतलब यह नही है की बिना बात के ही मुद्दे बना लें. कहने का मतलब यह है की छोटी मोटी लड़ाई होने पर अपने मन को दुख ना पहुचायें. यह तो बिल्कुल भी नही सोचें की प्यार कम हो गया है. नोक झोंक तो जीवन में थोड़ा मसाला बनाए रखती है.
जब हम अपने जीवन साथी से कोई बहस करते है तो वो इसलिए होती है क्यूकी हम नही चाहते की कुछ भी ऐसा हो जो उन्हे या हमें तकलीफ़ दे. दो लोगों की सोच एक सी नही हो सकती, उनके काम करने का तरीका भी अलग होता है ओर सोचने का तरीका भी.
ऐसे में बहस होना स्वाभाविक है.
ख़ास तौर पर ये बहस ज़्यादा तब नज़र आती है जब अब तक बस पति पत्नी बनकर रह रहे दो लोग अब माता पिता बन जायें. कुछ लोग बोलते हैं की बच्चा आ जाने से शायद दूरियाँ बढ़ जाती है पर यह भी एक बहुत बड़ी ग़लतफहमी है. एक नन्हे से बच्चे के आ जाने से नज़दीकियाँ बढ़ती है, और दो लोगों का रिश्ता अब किसी भी तरह ही फॉरमॅलिटी से दूर हो जाता है.
बच्चे के आने पर होने वाली बहस का कारण सिर्फ़ इतना होता है की दो लोग एक बच्चे को सबसे … सबसे अच्छी परवरिश देना चाहते है और होते दोनो ही नये खिलाड़ी है!


सच कहूँ तो यह बात लिख कर रख लीजिए की जैसे जैसे आपका बच्चा बड़ा होगा आपको अपनी पुरानी बहस के विषय सोचकर ही हंसी आएगी. पति पत्नी का रिश्ता बराबरी का होता है. कोई छोटा नही, कोई बड़ा नही, तालमेल बनाना पड़ता है और अगर ऐसे में थोड़ी नोक झोंक हो भी जाए तो क्या हुआ – गले लागो, एक दूसरे को मना लो, थोड़ा नाराज़ हो जाओ थोडा और मनाओ और हर छोटी मोटी नाराज़गी को नज़र का टीका मान कर फिर से साथ साथ बढ़ते जाओ.

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